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mahabharat 9.51.10: पुरुषप्रवर! उस महानदी ने हर्ष में भरकर पुत्र के लिए वीर्य को अपने स्तनों में धारण कर लिया और इस प्रकार वह गर्भवती हो गई॥10॥   |   mahabharat अध्याय 9.51: सारस्वततीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दधीच ऋषि और सारस्वत मुनिके चरित्रका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 51: सारस्वततीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दधीच ऋषि और सारस्वत मुनिके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  9.51.10 
कुक्षौ चाप्यदधाद् हृष्टा तद् रेत: पुरुषर्षभ।
सा दधार च तं गर्भं पुत्रहेतोर्महानदी॥ १०॥
 
 
अनुवाद
पुरुषप्रवर! उस महानदी ने हर्ष में भरकर पुत्र के लिए वीर्य को अपने स्तनों में धारण कर लिया और इस प्रकार वह गर्भवती हो गई॥10॥
 
Purushpravar! That Mahanadi, filled with joy, kept the semen in her breasts for the son and thus she became pregnant. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)