श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 51: सारस्वततीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दधीच ऋषि और सारस्वत मुनिके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  9.51.1 
वैशम्पायन उवाच
यत्रेजिवानुडुपती राजसूयेन भारत।
तस्मिंस्तीर्थे महानासीत् संग्रामस्तारकामय:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - "भरतनन्दन! यह वही सोमतीर्थ है जहाँ नक्षत्रों के स्वामी चन्द्रमा ने राजसूय यज्ञ किया था। उसी तीर्थ में नक्षत्रों का महान् संग्राम हुआ था॥1॥
 
Vaishampayana says, "Bharatanandan! That is the same Som-tirtha where the Lord of the stars, Chandrama, performed the Rajasuya Yagya. In that same tirtha, the great battle of stars took place.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)