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mahabharat 9.50.50: तपोधन देवल! विप्रवर! ब्रह्मलोक जहाँ जैगीश्वय गया है वहाँ जाने की शक्ति आपमें नहीं है। 50॥   |   mahabharat अध्याय 9.50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.50.50 
न देवलगतिस्तत्र तव गन्तुं तपोधन।
ब्रह्मण: सदने विप्र जैगीषव्यो यदाप्तवान्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
तपोधन देवल! विप्रवर! ब्रह्मलोक जहाँ जैगीश्वय गया है वहाँ जाने की शक्ति आपमें नहीं है। 50॥
 
‘Tapodhan Deval! Vipravara! You do not have the strength to go to Brahmaloka where Jaigishvaya has gone. 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)