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mahabharat 9.50.43-44h: हे शत्रुओं का दमन करने वाले राजन! इसके बाद असित ने जैगीषव्य ऋषि को किसी भी लोक में पुनः नहीं देखा। वे अदृश्य हो गए थे। 43 1/2   |   mahabharat अध्याय 9.50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र  »  श्लोक 43-44h
 
 
श्लोक  9.50.43-44h 
ततो मुनिवरं भूयो जैगीषव्यमथासित:॥ ४३॥
नान्वपश्यत लोकस्थमन्तर्हितमरिंदम।
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं का दमन करने वाले राजन! इसके बाद असित ने जैगीषव्य ऋषि को किसी भी लोक में पुनः नहीं देखा। वे अदृश्य हो गए थे। 43 1/2
 
O King who suppresses his enemies! After this Asita never saw sage Jaigishavya in any world again. He had become invisible. 43 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)