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mahabharat 9.50.36-37h: मैंने उसे समस्त मानव अनुष्ठानों में श्रेष्ठ अश्वमेध और नरमेध करने वालों के लोकों में भी देखा। ॥36 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र  »  श्लोक 36-37h
 
 
श्लोक  9.50.36-37h 
अश्वमेधं क्रतुवरं नरमेधं तथैव च॥ ३६॥
आहरन्ति नरश्रेष्ठास्तेषां लोकेष्वपश्यत।
 
 
अनुवाद
मैंने उसे समस्त मानव अनुष्ठानों में श्रेष्ठ अश्वमेध और नरमेध करने वालों के लोकों में भी देखा। ॥36 1/2॥
 
I also saw him in the worlds of those who perform the Ashwamedha and Naramedha, the best of all human rituals. ॥ 36 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)