Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.50.19-21h: देवल मुनि ने आश्रम में प्रवेश करते ही जैगीषव्य को वहाँ बैठे देखा, किन्तु जैगीषव्य ने उस समय भी उनसे कोई बात नहीं की। वे महान तपस्वी मुनि चुपचाप भूमि पर बैठे रहे। 19-20 1/2। | mahabharat अध्याय 9.50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत: स प्रविशन्नेव स्वमाश्रमपदं मुनि:॥ १९॥
आसीनमाश्रमे तत्र जैगीषव्यमपश्यत।
न व्याहरति चैवेनं जैगीषव्य: कथंचन॥ २०॥
काष्ठभूतोऽऽश्रमपदे वसति स्म महातपा:।
अनुवाद
देवल मुनि ने आश्रम में प्रवेश करते ही जैगीषव्य को वहाँ बैठे देखा, किन्तु जैगीषव्य ने उस समय भी उनसे कोई बात नहीं की। वे महान तपस्वी मुनि चुपचाप भूमि पर बैठे रहे। 19-20 1/2।
As soon as Deval Muni entered the ashram, he saw Jaigishavya sitting there, but Jaigishavya did not talk to him even at that time. That great ascetic sage was sitting silently on the ground. 19-20 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥