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mahabharat 9.50.15-16h: भरत! समुद्र के पास पहुँचकर धर्मात्मा देवल ने देखा कि जैगीषव्य तो वहाँ जा चुके हैं।   |   mahabharat अध्याय 9.50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  9.50.15-16h 
गच्छन्नेव स धर्मात्मा समुद्रं सरितां पतिम्॥ १५॥
जैगीषव्यं ततोऽपश्यद् गतं प्रागेव भारत।
 
 
अनुवाद
भरत! समुद्र के पास पहुँचकर धर्मात्मा देवल ने देखा कि जैगीषव्य तो वहाँ जा चुके हैं।
 
Bharat! On reaching the sea, the virtuous Deval saw that Jaigishavya had already gone there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)