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mahabharat 9.5.32: ‘यदि क्षत्रिय घर में भी मर जाए, तो वह निन्दनीय माना जाता है। घर में खाट पर सोते हुए क्षत्रिय का मरना महान पाप है।॥32॥   |   mahabharat अध्याय 9.5: दुर्योधनका कृपाचार्यको उत्तर देते हुए सन्धि स्वीकार न करके युद्धका ही निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 5: दुर्योधनका कृपाचार्यको उत्तर देते हुए सन्धि स्वीकार न करके युद्धका ही निश्चय करना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  9.5.32 
गृहे यत् क्षत्रियस्यापि निधनं तद् विगर्हितम्।
अधर्म: सुमहानेष यच्छय्यामरणं गृहे॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
‘यदि क्षत्रिय घर में भी मर जाए, तो वह निन्दनीय माना जाता है। घर में खाट पर सोते हुए क्षत्रिय का मरना महान पाप है।॥32॥
 
‘Even if a Kshatriya dies at home, it is considered condemnable. It is a great sin for a Kshatriya to die while sleeping on a cot at home.॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)