Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.5.22-23h: अभिमन्यु के विनाश से जिसका हृदय अत्यंत दुःखी है, उस अर्जुन के साथ मैं संधि कैसे कर सकता हूँ? जब मैं समुद्र से घिरी हुई सम्पूर्ण पृथ्वी का एकमात्र राजा होकर उपभोग कर चुका हूँ, तो अब पाण्डवों की कृपा का पात्र बनकर राज्य का उपभोग कैसे कर सकूँगा?॥ 22 1/2॥ | mahabharat अध्याय 9.5: दुर्योधनका कृपाचार्यको उत्तर देते हुए सन्धि स्वीकार न करके युद्धका ही निश्चय करना । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अभिमन्योर्विनाशेन स संधेय: कथं मया।
कथं च राजा भुक्त्वेमां पृथिवीं सागराम्बराम्॥ २२॥
पाण्डवानां प्रसादेन भोक्ष्ये राज्यमहं कथम्।
अनुवाद
अभिमन्यु के विनाश से जिसका हृदय अत्यंत दुःखी है, उस अर्जुन के साथ मैं संधि कैसे कर सकता हूँ? जब मैं समुद्र से घिरी हुई सम्पूर्ण पृथ्वी का एकमात्र राजा होकर उपभोग कर चुका हूँ, तो अब पाण्डवों की कृपा का पात्र बनकर राज्य का उपभोग कैसे कर सकूँगा?॥ 22 1/2॥
How can I enter into a peace treaty with Arjuna, whose heart is deeply hurt by the destruction of Abhimanyu? When I have already enjoyed the entire earth surrounded by the ocean as the sole king, how will I now enjoy the kingdom by becoming the recipient of the mercy of the Pandavas?॥ 22 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥