Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.48.8-9: तब विधि को जानने वाली तथा मधुर एवं मनोहर वचन बोलने वाली शुभाशुभ श्रुतवती इस प्रकार बोली - 'प्रभो! महामुनि! प्रभु! मेरे लिए आपकी क्या आज्ञा है? उत्तम व्रत! आज मैं अपनी सामर्थ्य के अनुसार आपको सब कुछ दूँगी; किन्तु इन्द्र के प्रति स्नेह के कारण मैं किसी भी प्रकार से आपको अपना हाथ नहीं दे सकूँगी।' | mahabharat अध्याय 9.48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उवाच नियमज्ञा च कल्याणी सा प्रियंवदा।
भगवन् मुनिशार्दूल किमाज्ञापयसि प्रभो॥ ८॥
सर्वमद्य यथाशक्ति तव दास्यामि सुव्रत।
शक्रभक्त्या च ते पाणिं न दास्यामि कथंचन॥ ९॥
अनुवाद
तब विधि को जानने वाली तथा मधुर एवं मनोहर वचन बोलने वाली शुभाशुभ श्रुतवती इस प्रकार बोली - 'प्रभो! महामुनि! प्रभु! मेरे लिए आपकी क्या आज्ञा है? उत्तम व्रत! आज मैं अपनी सामर्थ्य के अनुसार आपको सब कुछ दूँगी; किन्तु इन्द्र के प्रति स्नेह के कारण मैं किसी भी प्रकार से आपको अपना हाथ नहीं दे सकूँगी।'
Then the auspicious Shrutavati, who had knowledge of the rules and spoke sweet and pleasant words, said thus - 'Lord! Great sage! Lord! What is your order for me? Good vow! Today I will give you everything according to my ability; but due to my affection for Indra, I will not be able to offer you my hand in any way. 8-9.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥