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mahabharat 9.48.65-66h: जप करने वालों में श्रेष्ठ ऋषि ने वीर्य को हाथ में लिया, किन्तु वह तुरन्त ही एक पत्र-पात्र में गिर गया। वह कन्या वहीं प्रकट हुई।   |   mahabharat अध्याय 9.48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा  »  श्लोक 65-66h
 
 
श्लोक  9.48.65-66h 
स तु जग्राह तद्रेत: करेण जपतां वर:॥ ६५॥
तदापतत् पर्णपुटे तत्र सा संभवत् सुता।
 
 
अनुवाद
जप करने वालों में श्रेष्ठ ऋषि ने वीर्य को हाथ में लिया, किन्तु वह तुरन्त ही एक पत्र-पात्र में गिर गया। वह कन्या वहीं प्रकट हुई।
 
The sage, the best amongst those who chanted, took the semen in his hand, but it immediately fell into a leaf plate. The girl appeared right there. 65 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)