| श्री महाभारत » पर्व 9: शल्य पर्व » अध्याय 48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा » श्लोक 64-65h |
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| | | | श्लोक 9.48.64-65h  | वैशम्पायन उवाच
भरद्वाजस्य विप्रर्षे: स्कन्नं रेतो महात्मन:॥ ६४॥
दृष्ट्वाप्सरसमायान्तीं घृताचीं पृथुलोचनाम्। | | | | | | अनुवाद | | वैशम्पायन बोले, "हे राजन! एक दिन घृताची नाम की विशाल नेत्रों वाली एक अप्सरा कहीं से आ रही थी। उसे देखते ही महर्षि भरद्वाज का वीर्यपात हो गया।" | | | | Vaishampayana said, "O King! One day, a nymph named Ghritachi with huge eyes was coming from somewhere. On seeing her, the great sage Bharadwaj's semen got ejaculated." | | ✨ ai-generated | | |
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