श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  9.48.63 
जनमेजय उवाच
का तस्या भगवन् माता क्व संवृद्धा च शोभना।
श्रोतुमिच्छाम्यहं विप्र परं कौतूहलं हि मे॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा- हे प्रभु! सुन्दरी श्रुतवती की माता कौन थीं और उनका पालन-पोषण कहाँ हुआ था? मैं यह सुनना चाहता हूँ। हे ब्राह्मण! मैं इसके लिए बहुत उत्सुक हूँ।
 
Janamejaya asked— O Lord! Who was the mother of the beautiful Shrutavati and where was she brought up? I want to hear this. O Brahmin! I am very eager for this.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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