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mahabharat 9.48.57-58h: कल्याणी! तुम्हारे तेज और प्रभाव से मैं तुम्हें उस वरदान से भी उत्तम वरदान देता हूँ जो महात्मा भगवान शंकर ने अरुन्धती देवी को दिया था। 57 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा  »  श्लोक 57-58h
 
 
श्लोक  9.48.57-58h 
अरुन्धत्या वरस्तस्या यो दत्तो वै महात्मना।
तस्य चाहं प्रभावेण तव कल्याणि तेजसा॥ ५७॥
प्रवक्ष्यामि परं भूयो वरमत्र यथाविधि।
 
 
अनुवाद
कल्याणी! तुम्हारे तेज और प्रभाव से मैं तुम्हें उस वरदान से भी उत्तम वरदान देता हूँ जो महात्मा भगवान शंकर ने अरुन्धती देवी को दिया था। 57 1/2॥
 
Kalyani! With your brilliance and influence, I give a better boon than the one that Mahatma Lord Shankar had given to Arundhati Devi. 57 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)