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mahabharat 9.48.51-52h: देवदेवेश्वर! इस तीर्थस्थल पर शुद्ध मन से तीन रात्रि तक निवास करने से मनुष्य को बारह वर्ष तक व्रत करने का फल प्राप्त होता है। 51 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा  »  श्लोक 51-52h
 
 
श्लोक  9.48.51-52h 
तथास्मिन् देवदेवेश त्रिरात्रमुषित: शुचि:॥ ५१॥
प्राप्नुयादुपवासेन फलं द्वादशवार्षिकम्।
 
 
अनुवाद
देवदेवेश्वर! इस तीर्थस्थल पर शुद्ध मन से तीन रात्रि तक निवास करने से मनुष्य को बारह वर्ष तक व्रत करने का फल प्राप्त होता है। 51 1/2॥
 
Devdeveshwar! By staying in this pilgrimage site for three nights with a pure mind, a person can get the results of fasting for twelve years. 51 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)