Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.48.50-51h: तब बड़ी-बड़ी लाल आंखों वाली अरुंधती ने सप्तऋषियों की सभा में महादेव जी से कहा- 'यदि प्रभु मुझ पर प्रसन्न हों तो यह स्थान बादर पचन के नाम से प्रसिद्ध हो तथा सिद्धों और देवर्षियों का प्रिय एवं अद्भुत तीर्थस्थान बने।   |   mahabharat अध्याय 9.48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा  »  श्लोक 50-51h
 
 
श्लोक  9.48.50-51h 
साब्रवीत् पृथुताम्र्राक्षी देवं सप्तर्षिसंसदि।
भगवान् यदि मे प्रीतस्तीर्थं स्यादिदमद्भुतम्॥ ५०॥
सिद्धदेवर्षिदयितं नाम्ना बदरपाचनम्।
 
 
अनुवाद
तब बड़ी-बड़ी लाल आंखों वाली अरुंधती ने सप्तऋषियों की सभा में महादेव जी से कहा- 'यदि प्रभु मुझ पर प्रसन्न हों तो यह स्थान बादर पचन के नाम से प्रसिद्ध हो तथा सिद्धों और देवर्षियों का प्रिय एवं अद्भुत तीर्थस्थान बने।
 
Then Arundhati with large red eyes said to Mahadev Ji in the assembly of Saptarishis - 'If Lord is pleased with me then this place should become famous by the name of Badar Pachan and should become a favourite and wonderful pilgrimage place for Siddhas and Devarshis.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)