श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  9.48.49 
तत: प्रोवाच भगवांस्तामेवारुन्धतीं पुन:।
वरं वृणीष्व कल्याणि यत् तेऽभिलषितं हृदि॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद भगवान शंकर ने पुनः अरुन्धती से कहा - 'कल्याणि! अपनी मन की इच्छा के अनुसार कोई भी वर माँग लो।'
 
‘After this, Lord Shankar again said to Arundhati - 'Kalyani! Ask for any boon according to the desire of your heart.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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