श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  9.48.38-39h 
ब्राह्मं रूपं तत: कृत्वा महादेवो महायशा:॥ ३८॥
तामभ्येत्याब्रवीद् देवो भिक्षामिच्छाम्यहं शुभे।
 
 
अनुवाद
तब उन महाबली महादेव ने ब्राह्मण का रूप धारण किया और उसके पास जाकर बोले - 'शुभ! मुझे भिक्षा चाहिए।'
 
‘Then that mighty Mahadeva took the form of a Brahmin and went to him and said - 'Shubh! I want alms.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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