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mahabharat 9.48.37-38h: अरुन्धती को कठोर नियमों का आश्रय लेकर तपस्या करते देख तीन नेत्रों वाले भगवान शंकर अत्यंत प्रसन्न हुए ॥37 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.48.37-38h 
अरुन्धतीं ततो दृष्ट्वा तीव्रं नियममास्थिताम्॥ ३७॥
अथागमत् त्रिनयन: सुप्रीतो वरदस्तदा।
 
 
अनुवाद
अरुन्धती को कठोर नियमों का आश्रय लेकर तपस्या करते देख तीन नेत्रों वाले भगवान शंकर अत्यंत प्रसन्न हुए ॥37 1/2॥
 
Seeing Arundhati doing penance by taking refuge in strict rules, Lord Shankar, the one with three eyes, was very pleased. 37 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)