श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  9.48.33-34h 
विख्यातं त्रिषु लोकेषु ब्रह्मर्षिभिरभिप्लुतम्।
अस्मिन् खलु महाभागे शुभे तीर्थवरेऽनघे॥ ३३॥
त्यक्त्वा सप्तर्षयो जग्मुर्हिमवन्तमरुन्धतीम्।
 
 
अनुवाद
यह तीनों लोकों में प्रसिद्ध है। अनेक ब्रह्मर्षियों ने इसमें स्नान किया है। हे निष्पाप महापुरुष! एक समय सप्तर्षि अरुन्धती को इस पुण्य तीर्थ में छोड़कर हिमालय पर्वत पर चले गए। 33 1/2॥
 
‘It is famous in all three worlds. Many Brahmarishis have taken bath in it. Sinless great one! Once upon a time, the seven sages left Arundhati in this auspicious place of pilgrimage and went to the Himalayan Mountains. 33 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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