श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  9.48.32 
इदं च ते तीर्थवरं स्थिरं लोके भविष्यति।
सर्वपापापहं सुभ्रु नाम्ना बदरपाचनम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
शुभ्र! तुम्हारा यह महान तीर्थ इस लोक में स्थापित होगा, बदरपचन नाम से प्रसिद्ध होगा और समस्त पापों का नाश करने वाला होगा॥32॥
 
Subhru! This great pilgrimage place of yours will be established in this world, will become famous by the name of Badarpachan and will be the destroyer of all sins. 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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