Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.48.18-19h: माननीय! वह तीर्थ तीनों लोकों में इन्द्रतीर्थ के नाम से प्रसिद्ध है। देवराज भगवान पक्षाघात ने उस कन्या की भावना की परीक्षा लेने के लिए उन बेरों के फलों को पकने नहीं दिया। | mahabharat अध्याय 9.48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इन्द्रतीर्थेति विख्यातं त्रिषु लोकेषु मानद।
तस्या जिज्ञासनार्थं स भगवान् पाकशासन:॥ १८॥
बदराणामपचनं चकार विबुधाधिप:।
अनुवाद
माननीय! वह तीर्थ तीनों लोकों में इन्द्रतीर्थ के नाम से प्रसिद्ध है। देवराज भगवान पक्षाघात ने उस कन्या की भावना की परीक्षा लेने के लिए उन बेरों के फलों को पकने नहीं दिया।
Honorable! That pilgrimage is famous in all the three worlds by the name of Indratirtha. Devraj Bhagwan Pakshashan did not allow those berry fruits to ripen in order to test the feelings of that girl. 18 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥