Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.46.92-94h: युद्धभूमि में बार-बार प्रयोग की गई उनकी शक्ति, शत्रुओं का संहार करने के बाद, उनके पास वापस आ जाती थी। अग्निपुत्र कार्तिकेय में भी उतनी ही शक्ति है, या उससे भी अधिक। वे जितने पराक्रमी हैं, उनसे दुगुना यश, कीर्ति और धन-संपत्ति उन्हें प्राप्त है। उन्होंने क्रौंच पर्वत को भेदकर सैकड़ों राक्षसों का वध किया था। 92-93 1/2। | mahabharat अध्याय 9.46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युद्धभूमि में बार-बार प्रयोग की गई उनकी शक्ति, शत्रुओं का संहार करने के बाद, उनके पास वापस आ जाती थी। अग्निपुत्र कार्तिकेय में भी उतनी ही शक्ति है, या उससे भी अधिक। वे जितने पराक्रमी हैं, उनसे दुगुना यश, कीर्ति और धन-संपत्ति उन्हें प्राप्त है। उन्होंने क्रौंच पर्वत को भेदकर सैकड़ों राक्षसों का वध किया था। 92-93 1/2।
His power, used repeatedly on the battlefield, used to return to him after killing the enemy. Agniputra Kartikeya has the same power, or even more. He is blessed with twice as much glory, fame and wealth as he is valorous. He pierced the Krounch mountain and killed hundreds of demons. 92-93 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥