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mahabharat 9.46.89: तत्पश्चात् उस जलते हुए पर्वत से सैकड़ों-हजारों राक्षस विचित्र आभूषण और मालाएँ धारण करके प्रकट हुए।   |   mahabharat अध्याय 9.46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  9.46.89 
ततो दैत्या विनिष्पेतु: शतशोऽथ सहस्रश:।
प्रदीप्तात् पर्वतश्रेष्ठाद् विचित्राभरणस्रज:॥ ८९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उस जलते हुए पर्वत से सैकड़ों-हजारों राक्षस विचित्र आभूषण और मालाएँ धारण करके प्रकट हुए।
 
Thereafter, hundreds and thousands of demons wearing strange ornaments and garlands emerged from that burning mountain. 89.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)