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श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  9.46.83 
तमभ्ययान्महासेन: सुरशत्रुमुदारधी:।
स कार्तिकेयस्य भयात् क्रौञ्चं शरणमीयिवान्॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
उदारचित्त महासेन ने भी उस राक्षस पर आक्रमण किया, फिर कार्तिकेय के भय से वह क्रौंच पर्वत की शरण में छिप गया।
 
The generous minded Mahasen also attacked that demon. Then, fearing Kartikeya, he hid in the shelter of Krauncha mountain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)