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mahabharat 9.46.53-54h: देवताओं की आज्ञा पाकर तेजस्वी स्कन्द अपने तेज से चमकने लगे और अन्य अग्निदेवों के समान शोभायमान होने लगे ॥53 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार  »  श्लोक 53-54h
 
 
श्लोक  9.46.53-54h 
सैनापत्यमनुप्राप्य स्कन्दो देवगणस्य ह॥ ५३॥
शुशुभे ज्वलितोऽर्चिष्मान् द्वितीय इव पावक:।
 
 
अनुवाद
देवताओं की आज्ञा पाकर तेजस्वी स्कन्द अपने तेज से चमकने लगे और अन्य अग्निदेवों के समान शोभायमान होने लगे ॥53 1/2॥
 
After getting the command of the gods, the brilliant Skanda started glowing with his brilliance and started becoming beautiful like other fire gods. 53 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)