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mahabharat 9.46.44-45: तत्पश्चात् भगवान् पक्षासन ने कुमार कार्तिकेय को द्रोहियों के विनाश के लिए शक्ति नामक अस्त्र प्रदान किया। साथ ही उन्होंने एक विशाल घंटा भी दिया जो अत्यन्त तीव्र ध्वनि करता था और अपनी तेज ज्योति से चमक रहा था। 44-45॥   |   mahabharat अध्याय 9.46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार  »  श्लोक 44-45
 
 
श्लोक  9.46.44-45 
तत: शक्त्यस्त्रमददद् भगवान् पाकशासन:॥ ४४॥
गुहाय राजशार्दूल विनाशाय सुरद्विषाम्।
महास्वनां महाघण्टां द्योतमानां सितप्रभाम्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भगवान् पक्षासन ने कुमार कार्तिकेय को द्रोहियों के विनाश के लिए शक्ति नामक अस्त्र प्रदान किया। साथ ही उन्होंने एक विशाल घंटा भी दिया जो अत्यन्त तीव्र ध्वनि करता था और अपनी तेज ज्योति से चमक रहा था। 44-45॥
 
The best! Thereafter, Lord Pakshasan gave a weapon called Shakti to Kumar Kartikeya for the destruction of the traitors. Along with this, he also gave a huge bell which made a loud sound, which was shining with its bright light. 44-45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)