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श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  9.46.41 
अचिन्त्यबलवीर्याश्च तथाचिन्त्यपराक्रमा:।
वृक्षचत्वरवासिन्यश्चतुष्पथनिकेतना:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
उसका बल, पराक्रम और पराक्रम अकल्पनीय है। वह वृक्षों, चबूतरों और चौराहों पर निवास करती है। 41।
 
Her strength, valour and prowess are inconceivable. She resides on trees, platforms and crossroads. 41.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)