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mahabharat 9.46.33: इनमें से कुछ मातृकाएँ केवल हड्डियों से बनी हैं। उनमें मांस का लेश भी नहीं है। कुछ श्वेत वर्ण की हैं और कुछ स्वर्णवर्ण की हैं। हे भरतश्रेष्ठ! कुछ मातृकाएँ काले बादलों के समान काली हैं और कुछ धूम्रवर्ण की हैं॥ 33॥   |   mahabharat अध्याय 9.46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  9.46.33 
निर्मांसगात्र्य: श्वेताश्च तथा काञ्चनसंनिभा:।
कृष्णमेघनिभाश्चान्या धूम्राश्च भरतर्षभ॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
इनमें से कुछ मातृकाएँ केवल हड्डियों से बनी हैं। उनमें मांस का लेश भी नहीं है। कुछ श्वेत वर्ण की हैं और कुछ स्वर्णवर्ण की हैं। हे भरतश्रेष्ठ! कुछ मातृकाएँ काले बादलों के समान काली हैं और कुछ धूम्रवर्ण की हैं॥ 33॥
 
Some of these Matrikas have bodies made up of mere bones. There is no trace of flesh in them. Some are white in colour and some have a golden complexion. O best of Bharatas! Some Matrikas are black like dark clouds and some are smoky in colour.॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)