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mahabharat 9.46.107-108h: शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले मधुवंशी हलधर वहाँ रात भर ठहरे और उस महान तीर्थस्थान की पूजा करके तथा उसके जल में स्नान करके आनंद से भर गए। यदुश्रेष्ठ बलरामजी का मन वहाँ प्रसन्न हो गया ॥107 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार  »  श्लोक 107-108h
 
 
श्लोक  9.46.107-108h 
उषित्वा रजनीं तत्र माधव: परवीरहा।
पूज्य तीर्थवरं तच्च स्पृष्ट्वा तोयं च लाङ्गली॥ १०७॥
हृष्ट: प्रीतमनाश्चैव ह्यभवन्माधवोत्तम:।
 
 
अनुवाद
शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले मधुवंशी हलधर वहाँ रात भर ठहरे और उस महान तीर्थस्थान की पूजा करके तथा उसके जल में स्नान करके आनंद से भर गए। यदुश्रेष्ठ बलरामजी का मन वहाँ प्रसन्न हो गया ॥107 1/2॥
 
Madhuvanshi Haldhar, who killed the enemy warriors, stayed there the whole night and was filled with joy after worshiping that great place of pilgrimage and bathing in its waters. The mind of that best of the Yadus, Balram, became happy there. 107 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)