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mahabharat 9.46.106: उस उत्तम तीर्थस्थान पर स्नान करके हलधारी बलरामजी ने स्कन्ददेव की पूजा की तथा ब्राह्मणों को स्वर्ण, वस्त्र और आभूषण दिये।   |   mahabharat अध्याय 9.46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  9.46.106 
अस्मिंस्तीर्थवरे स्नात्वा स्कन्दं चाभ्यर्च्य लाङ्गली।
ब्राह्मणेभ्यो ददौ रुक्मं वासांस्याभरणानि च॥ १०६॥
 
 
अनुवाद
उस उत्तम तीर्थस्थान पर स्नान करके हलधारी बलरामजी ने स्कन्ददेव की पूजा की तथा ब्राह्मणों को स्वर्ण, वस्त्र और आभूषण दिये।
 
After bathing at that excellent place of pilgrimage, plough-bearing Balarama worshipped Skandadev and gave gold, clothes and ornaments to the Brahmins.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)