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mahabharat 9.46.103: वहाँ रहकर स्वामी स्कन्द ने नाना प्रकार के ऐश्वर्य दिये और अग्निकुमार ने अपनी सेना के प्रधान अधिकारियों को तीनों लोक सौंप दिये ॥103॥   |   mahabharat अध्याय 9.46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  9.46.103 
ऐश्वर्याणि च तत्रस्थो ददावीश: पृथक् पृथक्।
ददौ नैर्ऋतमुख्येभ्यस्त्रैलोक्यं पावकात्मज:॥ १०३॥
 
 
अनुवाद
वहाँ रहकर स्वामी स्कन्द ने नाना प्रकार के ऐश्वर्य दिये और अग्निकुमार ने अपनी सेना के प्रधान अधिकारियों को तीनों लोक सौंप दिये ॥103॥
 
By staying there, Swami Skanda gave different opulences. Agnikumar handed over all the three worlds to the chief officers of his army. 103॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)