श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 43: ऋषियोंके प्रयत्नसे सरस्वतीके शापकी निवृत्ति, जलकी शुद्धि तथा अरुणासंगममें स्नान करनेसे राक्षसों और इन्द्रका संकटमोचन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  9.43.4 
कस्यचित् त्वथ कालस्य ऋषय: सुतपोधना:।
तीर्थयात्रां समाजग्मु: सरस्वत्यां महीपते॥ ४॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वीनाथ! कुछ समय पश्चात् बहुत से तपोधन ऋषिगण तीर्थयात्रा के लिए सरस्वती के तट पर आये॥4॥
 
Prithvinath! After some time, many Tapodhan sages came to the banks of Saraswati for pilgrimage. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)