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mahabharat 9.41.34: वहाँ यज्ञ करके सिंहपुरुष ययाति प्रसन्नतापूर्वक ऊपर के लोक में चले गए और वहाँ उन्होंने अनेक पुण्य लोकों को प्राप्त किया ॥34॥   |   mahabharat अध्याय 9.41: अवाकीर्ण और यायात तीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दाल्भ्यकी कथा और ययातिके यज्ञका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 41: अवाकीर्ण और यायात तीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दाल्भ्यकी कथा और ययातिके यज्ञका वर्णन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  9.41.34 
तत्रेष्ट्वा पुरुषव्याघ्रो ययाति: पृथिवीपति:।
अक्रामदूर्ध्वं मुदितो लेभे लोकांश्च पुष्कलान्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
वहाँ यज्ञ करके सिंहपुरुष ययाति प्रसन्नतापूर्वक ऊपर के लोक में चले गए और वहाँ उन्होंने अनेक पुण्य लोकों को प्राप्त किया ॥34॥
 
After performing the sacrifice there, the lion-man Yayati happily went to the higher world and there he attained many virtuous worlds. ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)