vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 9: शल्य पर्व
»
अध्याय 41: अवाकीर्ण और यायात तीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दाल्भ्यकी कथा और ययातिके यज्ञका वर्णन
»
श्लोक 14
श्लोक
9.41.14
तस्मिंस्तु विधिवत् सत्रे सम्प्रवृत्ते सुदारुणे।
अक्षीयत ततो राष्ट्रं धृतराष्ट्रस्य पार्थिव॥ १४॥
अनुवाद
महाराज! जब से विधिपूर्वक वह भयंकर यज्ञ आरम्भ हुआ, तब से धृतराष्ट्र के राज्य का पतन होने लगा।
King! From the time that dreadful yajna was commenced in accordance with the rituals, Dhritarashtra's kingdom began to decline. 14.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×