vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 9: शल्य पर्व
»
अध्याय 41: अवाकीर्ण और यायात तीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दाल्भ्यकी कथा और ययातिके यज्ञका वर्णन
»
श्लोक 10-11h
श्लोक
9.41.10-11h
चिन्तयित्वा मुहूर्तेन रोषाविष्टो द्विजोत्तम:॥ १०॥
मतिं चक्रे विनाशाय धृतराष्ट्रस्य भूपते:।
अनुवाद
इस प्रकार दो घड़ी तक चिन्ता करने के बाद द्विजश्रेष्ठ दलभ्यान ने क्रोध में भरकर राजा धृतराष्ट्र का नाश करने का विचार किया ॥10 1/2॥
After worrying like this for two hours, Dalbhyan, the best of the Dwijs, filled with anger, thought of destroying King Dhritarashtra. 10 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×