राजन! उस महान तीर्थस्थान में श्रेष्ठ ब्राह्मणों का पूजन करके भगवान बलरामजी ने प्रसन्नतापूर्वक उन्हें दूध देने वाली गौएँ, वाहन, शय्या, वस्त्र, आभूषण और सुन्दर भोजन सामग्री प्रदान की। फिर वहाँ से वे बक्के आश्रम के पास गए, जहाँ दलभपुत्र बक्के घोर तप कर रहे थे। 30-32॥
Rajan! After worshiping the best Brahmins in that great place of pilgrimage, Lord Balram happily gave them milk-yielding cows, vehicles, beds, clothes, ornaments and beautiful food items. Then from there they went near Bakke Ashram, where Dalbhaputra Bakke was performing intense penance. 30-32॥
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि गदापर्वणि बलदेवतीर्थयात्रायां सारस्वतोपाख्याने चत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वके अन्तर्गत गदापर्वमें बलदेवजीकी तीर्थयात्राके प्रसंगमें सारस्वतोपाख्यानविषयक चालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४०॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥