आत्मनोऽर्थे त्वया लोको यत्नत: सर्व आहृत:।
स ते संशायितस्तात आत्मा वै भरतर्षभ॥ ४१॥
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! आपने अपनी रक्षा के लिए बड़े प्रयत्न से सम्पूर्ण जगत के लोगों को एकत्रित किया था, किन्तु आपका अपना जीवन ही संदेह में पड़ गया है॥41॥
O best of the Bharatas! You had gathered the people of the whole world with great effort for your own protection, but your own life has fallen into doubt. ॥ 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥