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श्री महाभारत
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पर्व 9: शल्य पर्व
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अध्याय 4: कृपाचार्यका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना
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श्लोक 24
श्लोक
9.4.24
विक्षोभयन्तं सेनां ते त्रासयन्तं च पार्थिवान्।
धनंजयमपश्याम नलिनीमिव कुञ्जरम्॥ २४॥
अनुवाद
जैसे मतवाला हाथी तालाब में घुसकर उसे मथता है, वैसे ही हमने अर्जुन को आपकी सेना का मथते और राजाओं को भयभीत करते देखा है॥ 24॥
‘Just as a drunken elephant enters a pond and churns it, similarly we have seen Arjuna churning your army and frightening the kings.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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