श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 4: कृपाचार्यका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  9.4.17 
सिंहनादाच्च भीमस्य पाञ्चजन्यस्वनेन च।
गाण्डीवस्य च निर्घोषात् सम्मुह्यन्ते मनांसि न:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन की गर्जना, पांचजन्य शंख की ध्वनि और गांडीव धनुष की टंकार से हमारे हृदय कांप उठते हैं॥17॥
 
‘The roar of Bhimasena, the sound of the Panchajanya conch and the twirling of the Gandiva bow make our hearts tremble.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)