Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.4.1-6: संजय कहते हैं— हे राजन! उस समय युद्धस्थल में महामनस्वी योद्धाओं के रथ और आसन टूटे पड़े थे। हाथी और पैदल सैनिक अपने सवारों सहित मारे जा रहे थे। वह युद्धस्थल रुद्रदेव के क्रीड़ास्थल के समान अत्यन्त भयानक प्रतीत हो रहा था और वहाँ लाखों राजाओं का नामोनिशान मिट गया था। यह सब देखकर आपके पुत्र दुर्योधन का हृदय शोक में डूब गया और वह युद्ध से विमुख हो गया। कुन्तीपुत्र अर्जुन का पराक्रम देखकर, जब समस्त सेनाएँ भय से अत्यन्त व्याकुल हो उठीं और महान शोक में मग्न हो गईं, उस समय सैनिकों के कुचले जाने का घोर क्रन्दन सुनकर और राजाओं के प्रतीक ध्वजा आदि को युद्धस्थल में क्षतिग्रस्त होते देखकर, प्रौढ़ावस्था वाले और उत्तम स्वभाव वाले महाप्रतापी कृपाचार्य के हृदय में बड़ी दया उत्पन्न हुई। हे भरतवंशी राजा! वे बातचीत में अत्यन्त कुशल थे। राजा दुर्योधनके पास जाकर उसकी विवशता देखकर उन्होंने इस प्रकार कहा—॥1-6॥ | mahabharat अध्याय 9.4: कृपाचार्यका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संजय कहते हैं— हे राजन! उस समय युद्धस्थल में महामनस्वी योद्धाओं के रथ और आसन टूटे पड़े थे। हाथी और पैदल सैनिक अपने सवारों सहित मारे जा रहे थे। वह युद्धस्थल रुद्रदेव के क्रीड़ास्थल के समान अत्यन्त भयानक प्रतीत हो रहा था और वहाँ लाखों राजाओं का नामोनिशान मिट गया था। यह सब देखकर आपके पुत्र दुर्योधन का हृदय शोक में डूब गया और वह युद्ध से विमुख हो गया। कुन्तीपुत्र अर्जुन का पराक्रम देखकर, जब समस्त सेनाएँ भय से अत्यन्त व्याकुल हो उठीं और महान शोक में मग्न हो गईं, उस समय सैनिकों के कुचले जाने का घोर क्रन्दन सुनकर और राजाओं के प्रतीक ध्वजा आदि को युद्धस्थल में क्षतिग्रस्त होते देखकर, प्रौढ़ावस्था वाले और उत्तम स्वभाव वाले महाप्रतापी कृपाचार्य के हृदय में बड़ी दया उत्पन्न हुई। हे भरतवंशी राजा! वे बातचीत में अत्यन्त कुशल थे। राजा दुर्योधनके पास जाकर उसकी विवशता देखकर उन्होंने इस प्रकार कहा—॥1-6॥
Sanjaya says— Respected King! At that time, the chariots and seats of the great-minded warriors were lying broken on the battlefield. Elephants and foot soldiers along with their riders were killed. That battlefield looked very dreadful like Rudradev's playground crematorium and there the name and trace of lakhs of kings had been wiped out. Seeing all this, your son Duryodhan's heart was drowned in grief and he turned away from the war, seeing the valour of Kunti's son Arjun, when all the armies were extremely troubled with fear and became engrossed in great sorrow, at that time, hearing the loud cries of the soldiers being crushed and seeing the flags etc., which were the symbols of the kings, being damaged on the battlefield, the illustrious Kripacharya, who was of mature age and of good nature, felt great compassion in his heart. King of Bharat's lineage! He was very skilled in conversation. Going near King Duryodhan and seeing his helplessness, he said thus—॥1-6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥