श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  9.38.35 
तद् रेत: स तु जग्राह कलशे वै महातपा:।
सप्तधा प्रविभागं तु कलशस्थं जगाम ह॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
महातपस्वी ऋषि ने उस वीर्य को एक घड़े में एकत्रित किया। घड़े में रखने पर वह वीर्य सात भागों में विभक्त हो गया। 35.
 
The great ascetic sage collected that semen in a pitcher. After being placed in the pitcher, the semen got divided into seven parts. 35.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)