तत्राप्यमितविक्रान्त: स्पृष्ट्वा तोयं हलायुध:॥ ५३॥
दत्त्वा च विविधान् दायान् पूजयित्वा च वै द्विजान्।
अनुवाद
महाबली भगवान् बलरामजी ने उस पवित्र स्थान के जल का स्पर्श किया और ब्राह्मणों का पूजन करके उन्हें नाना प्रकार की सम्पत्तियाँ प्रदान कीं ॥53 1/2॥
Lord Balarama, the mighty Lord, touched the water of that holy place and after worshipping the Brahmins, bestowed them with various kinds of wealth. ॥ 53 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥