श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 36: उदपानतीर्थकी उत्पत्तिकी तथा त्रित मुनिके कूपमें गिरने, वहाँ यज्ञ करने और अपने भाइयोंको शाप देनेकी कथा  »  श्लोक 53-54h
 
 
श्लोक  9.36.53-54h 
तत्राप्यमितविक्रान्त: स्पृष्ट्वा तोयं हलायुध:॥ ५३॥
दत्त्वा च विविधान् दायान् पूजयित्वा च वै द्विजान्।
 
 
अनुवाद
महाबली भगवान् बलरामजी ने उस पवित्र स्थान के जल का स्पर्श किया और ब्राह्मणों का पूजन करके उन्हें नाना प्रकार की सम्पत्तियाँ प्रदान कीं ॥53 1/2॥
 
Lord Balarama, the mighty Lord, touched the water of that holy place and after worshipping the Brahmins, bestowed them with various kinds of wealth. ॥ 53 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)