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श्लोक 9.35.86  |
अतश्चैतत् प्रजानन्ति प्रभासमिति भूमिप।
प्रभां हि परमां लेभे तस्मिन्नुन्मज्ज्य चन्द्रमा:॥ ८६॥ |
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| अनुवाद |
| हे जमींदार! इसीलिए तो सब लोग उसे प्रभासतीर्थ के नाम से जानते हैं; क्योंकि उसमें गोता लगाकर चन्द्रमा ने उत्तम प्रकाश प्राप्त किया था ॥86॥ |
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| Landlord! That is why everyone knows him by the name of Prabhastirtha; Because by diving into it the moon had obtained excellent light. 86॥ |
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