श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 35: बलदेवजीकी तीर्थयात्रा तथा प्रभास-क्षेत्रके प्रभावका वर्णनके प्रसंगमें चन्द्रमाके शापमोचनकी कथा  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  9.35.84 
एवं ते सर्वमाख्यातं यथा शप्तो निशाकर:।
प्रभासं च यथा तीर्थं तीर्थानां प्रवरं महत्॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
मैंने तुम्हें वह सम्पूर्ण घटना बता दी है कि किस प्रकार चन्द्रमा को शाप मिला था और किस प्रकार महान प्रभास तीर्थ समस्त तीर्थों में श्रेष्ठ माना गया था ॥ 84॥
 
I have narrated to you the entire incident of how the Moon was cursed and how the great Prabhas Tirtha was considered the best among all pilgrimage places. ॥ 84॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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