vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 9: शल्य पर्व
»
अध्याय 35: बलदेवजीकी तीर्थयात्रा तथा प्रभास-क्षेत्रके प्रभावका वर्णनके प्रसंगमें चन्द्रमाके शापमोचनकी कथा
»
श्लोक 77
श्लोक
9.35.77
समुद्रं पश्चिमं गत्वा सरस्वत्यब्धिसङ्गमम्।
आराधयतु देवेशं तत: कान्तिमवाप्स्यति॥ ७७॥
अनुवाद
यदि कोई पश्चिमी समुद्र तट पर जाए, जहां सरस्वती और समुद्र का मिलन होता है, और भगवान चन्द्रमा की पूजा करे, तो वह अपनी चमक पुनः प्राप्त कर लेगा।'
If one goes to the western seashore where Saraswati and the sea meet, and worships Lord Chandrama, he will regain his radiance.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×