श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 35: बलदेवजीकी तीर्थयात्रा तथा प्रभास-क्षेत्रके प्रभावका वर्णनके प्रसंगमें चन्द्रमाके शापमोचनकी कथा  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  9.35.77 
समुद्रं पश्चिमं गत्वा सरस्वत्यब्धिसङ्गमम्।
आराधयतु देवेशं तत: कान्तिमवाप्स्यति॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई पश्चिमी समुद्र तट पर जाए, जहां सरस्वती और समुद्र का मिलन होता है, और भगवान चन्द्रमा की पूजा करे, तो वह अपनी चमक पुनः प्राप्त कर लेगा।'
 
If one goes to the western seashore where Saraswati and the sea meet, and worships Lord Chandrama, he will regain his radiance.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)