श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 35: बलदेवजीकी तीर्थयात्रा तथा प्रभास-क्षेत्रके प्रभावका वर्णनके प्रसंगमें चन्द्रमाके शापमोचनकी कथा  »  श्लोक 70-71
 
 
श्लोक  9.35.70-71 
असौहि चन्द्रमा: क्षीण: किञ्चिच्छेषो हि लक्ष्यते॥ ७०॥
क्षयाच्चैवास्य देवेश प्रजाश्चैव गता: क्षयम्।
वीरुदोषधयश्चैव बीजानि विविधानि च॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
चन्द्रमा क्षीण हो गया है और उसका केवल एक छोटा-सा भाग ही दिखाई दे रहा है। हे प्रभु! उसके क्षय होने से लताएँ, वृक्ष, औषधियाँ, विविध बीज तथा समस्त जनसंख्या भी क्षीण हो गई है।' 70-71
 
‘The moon has become weak and only a small part of it is visible. O lord! Due to its decay, creepers, trees, medicinal herbs, various seeds and the entire population have also become weak. 70-71.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas