श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 35: बलदेवजीकी तीर्थयात्रा तथा प्रभास-क्षेत्रके प्रभावका वर्णनके प्रसंगमें चन्द्रमाके शापमोचनकी कथा  »  श्लोक 68-69h
 
 
श्लोक  9.35.68-69h 
एवमुक्त: प्रत्युवाच सर्वांस्तान् शशलक्षण:॥ ६८॥
शापस्य लक्षणं चैव यक्ष्माणं च तथाऽऽत्मन:।
 
 
अनुवाद
उनके इस प्रकार पूछने पर चन्द्रमा ने उन सबके उत्तर में उन्हें शाप के कारण क्षय रोग की उत्पत्ति बताई।
 
On their asking in this manner the Moon, in reply to all of them, told them about the origin of tuberculosis due to the curse he had received. 68 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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