श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 35: बलदेवजीकी तीर्थयात्रा तथा प्रभास-क्षेत्रके प्रभावका वर्णनके प्रसंगमें चन्द्रमाके शापमोचनकी कथा  »  श्लोक 60-61h
 
 
श्लोक  9.35.60-61h 
रोहिण्यामेव भगवान् सदा वसति चन्द्रमा:।
न त्वद्वचो गणयति नास्मासु स्नेहमिच्छति॥ ६०॥
तस्मान्नस्त्राहि सर्वा वै यथा न: सोम आविशेत्।
 
 
अनुवाद
भगवान चन्द्रमा सदैव रोहिणी के निकट रहते हैं। वे आपकी बातों पर ध्यान नहीं देते। वे हम पर स्नेह नहीं करना चाहते, अतः आप हम सबकी रक्षा करें, जिससे चन्द्रमा भी हमसे सम्बन्ध बनाए रखें।॥60 1/2॥
 
‘Lord Chandrama always stays near Rohini. He does not pay any heed to your words. He does not want to show affection towards us, hence you should protect all of us, so that Chandrama also maintains relations with us.'॥ 60 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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