श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 35: बलदेवजीकी तीर्थयात्रा तथा प्रभास-क्षेत्रके प्रभावका वर्णनके प्रसंगमें चन्द्रमाके शापमोचनकी कथा  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  9.35.57 
तासां तद् वचनं श्रुत्वा दक्ष: सोममथाब्रवीत्।
समं वर्तस्व भार्यासु मा त्वां शप्स्ये विरोचन॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर दक्ष ने सोम से पुनः कहा - 'हे तेजस्वी चन्द्रदेव! आपको अपनी सभी पत्नियों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए, अन्यथा मैं आपको शाप दे दूँगा।'
 
Hearing this, Daksha again said to Som - 'O shining moon-god! You must treat all your wives equally, or else I will curse you.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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